रविवार, ५ मे, २०१९

खामोशिया



रात की इन नर्म खामोशियो मे ना जाने है कितनी दास्ताने...
कुछ अनकही करवटें .. कही ना छलके पैमाने
कभी सुन कर देखो ये खामोशिया....ये रात भी कुछ कहेती है
तुम क्या जानो मेरा गम...दिन का शोर इस से कई बेहेतर है!!!!
-तेजाली
11/11/2013

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